इस गुरुपूर्णिमा पर घड़ी से देखकर मात्र ३मिनट का उद्बोधन श्री स्वामी धर्मात्मानन्द जी महाराज परमहंस द्वारा हुआ-
॔तजो रे मन हरि विमुखन को संग।
जिनके संग कुमति उपजति है,परत भजन में भंग।।
गंदे लोगों का साथ नहीं करना चाहिए।जो बुरा है और बुराई कर रहा है,कह रहा है, उसकी बातों में नहीं आना चाहिए। जैसे मंथरा और कैकेयी का हुआ----उसका सर्वनाश हो गया। उसी तरह दूसरे का बतसंग (बद्संग)करोगे तो बहुत बुरी दशा होगी।
तो बच्चों,अब अपने-अपने घर जाइए, बहुत गर्मी पड़ रही है।दूर-दराज से जितने भक्त आए हैं उनको मालिक का आशीर्वाद प्राप्त हो और सब लोग खुशहाल रहें।और जीवन में खुशहाली का बीज रोपें।।
बोलिए प्रेम से सतगुरु भगवान् की जय।
इसी तरह से हर साल अपना गुरु पूर्णिमा मनाइए-हंसी-खुशी के साथ। कभी भी अपने गुरु के चरण को नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि वेद,पुराण, शास्त्र -ग्रन्थ में लिखा है गुरु महिमा कि---राम कृष्ण से कौन बड़ा,तिनहु तो गुरु कीन। तीन लोक के वे धनी गुरु आगे आधीन।।
राम कृष्ण से कोई बड़ा नहीं रहा लेकिन वे भी गुरु से आधीन रहे।
प्रेम से बोलिए सदगुरु भगवान की जै।।
गुरु देव ने कहा जीवन में खुशहाली के बीज रोपें। मगर कैसे?
१-प्रसन्नता चाहते हों तो कहानी में संशोधन करें-
हमारे चित्त को गढ़ने में हमारे जीवन में घटित घटनाओं और अनुभव के आधार पर हम किस तरह सोचते हैं-एक महत्वपूर्ण कारक है। हम अपने जीवन में लगातार वर्णनात्मक शैली में कथा रच रहे हैं। यदि हम बैड स्टोरी रच या कह रहे हैं या ऐसी कहानी बुन रहे हैं जो हमें पीछे खींच रही है तो हमें इस कहानी को संशोधन करने की शक्ति भी मिली है,हम अभी से एक गुड-स्टोरी रच सकते हैं।२-समझदारी पूर्वक प्रेम करें-आपके जीवन के जो विभिन्न पहलू हैं उन सभी पर समय और भावनाओं का सम्यक निवेश करें--स्वयं पर, विवाह पर, परिवार की प्राथमिकता पर, जोड़े पर, मित्रों पर, अपने काम और अपने समूह परLOVE WISELY NOT TO WELLकुछलोग उल्टा करते हैंONE THAT LOVED NOT WISELY BUT TO WELLबुद्धिमानी से प्यार नहीं करते बल्कि गहराई से प्यार करते हैं।३_-यदिआपमें सहज कृतज्ञता का भाव नहीं है तो आप सामान्यतः अच्छी चीजों की नोटिस लेना शुरू कर दीजिए। हमेशा अच्छी चीजें ही देखिए यद्यपि उस क्षण में आप उसके प्रति कृतज्ञ अनुभव नहीं करते तब भी। यह एक रोज का अभ्यास होना चाहिए कि आप अच्छी चीजों पर ही ध्यान देंगे और अधिक से अधिक ध्यान देंगे तब यह कसरत की तरह काम करेगा। जैसे कसरत मांसपेशियों को मजबूत बनाने का काम करता है इस अभ्यास से कृतज्ञ होने की आपकी क्षमता का विकास होगा।
४-सीधे प्रसन्नता के विषय में ज्यादा मत सोचिए।अति प्रसन्नता की सोच गोली के बैक फायर की तरह आत्मघाती है। इसके बदले ऐसी चीजें करिए जिससे सम्बन्ध सुधरें या अपने शौक पूरे हों तब प्रसन्नता अनिच्छित ही आपके पास बाइप्रोडक्ट की तरह चली आएगी।
५-प्रसंन्न लोग हास्य का प्रयोग दूसरों के मनोरंजन के लिए या कठिन परिस्थितियों को सम्भालने के लिए करते हैं जबकि चिड़चिड़े स्वभाव के लोग हास्य का प्रयोग दूसरों की आलोचना करने या दूसरे को वश में करने के लिए करते हैं।
५-आप देखते हैं कि आपकी प्रसन्नता खो रही है तो आप अपनी आय का एक हिस्सा समझदारी पूर्वक अनुभव प्राप्त करने के लिए खर्च करें।वाल्डिंगर का कहना है कि भौतिक चीजों की खरीदारी हमें थोड़े समय के लिए थोड़ी प्रसन्नता देती है बनिस्पत इसके कि उसी पैसे को खर्च कर हम कोई अनुभव इकट्ठा करें ख़ासतौर से दूसरे लोगों के साथ, परिवार या मित्रों के साथ बाहर घूमने जाना और छुट्टियां मनाना।
६-उदार दानी और सुखी हों। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार जो लोग दूसरों पर धन खर्च करते हैं वे उनकी अपेक्षा ज्यादा प्रसन्न रहते हैं जो खुद पर धन खर्च करते हैं। GIVING IS POWERFUL HAPPINESS GENERATOR.देना प्रसन्नता का शक्तिशाली जनरेटर है,यह हमें मालकियत का बोध कराता है कि हमारे पास है जो कतज्ञता का फैलाव है।
हममें से अधिकांश की मानसिकता और विनम्रता लोगों से लेने और अधिकार जमाने की है। जो हमारे जीवन की नकारात्मक दृष्टि बोध है। जो तुम्हारे पास है उसे स्वीकार करो और उसके लिए कृतज्ञ हो। उदारता और दूसरों का ख्याल रखना हमारे लिए संतुष्टि लेकर आता है ।,,७SPEND MONEY SMARTER ऐसी चीजों पर खर्च करना जो समय की बचत करते हो ज्यादा संतुष्टि दायक है इसलिए यदि थोड़ा महंगा ही सही अपने नजदीक की दुकान से सामान खरीदें। एक समय पर एक काम करो । तब हम सही फोकस कर सकते हैं। Hij research showed that people are happiest when having sex , exercising or converging all things that requires focus and least Happy, when resting wapking working are using a home computer.
८-जब हम अपने जीवन में उन चीजों के बारे में सोचते हैं जो हमें पसंद करती हैं जैसे हमारा परिवार हमारी हावी और मित्र तब कल्पना कीजिए यदि यह चीजें हमारे पास ना होती तो हमारा जीवन कैसा होता है यह अच्छी तरह समझ में आ जाने पर हमें प्रसन्नता की मात्रा बढ़ती है ।
Upward spiral के लेखक न्यूरोसाइंटिस्ट एल एक्स कार्ब क
हते हैं धूप में धूप का चश्मा पहनना भी हमें थोड़ी ज्यादा प्रसन्नता से भर देता है और यह मस्तक के सुपर सिली मसल्स के कारण होता है। यदि हम अपसेट हैं तो भी ऐसा करके सामान्य हो सकते हैं।।
स्क्रीन टाइम में कमी करके भी हम ज्यादा प्रसन्न रह सकते हैं। एक नए अध्ययन के अनुसार 1 घंटे का स्क्रीन टाइम भी बड़ी प्रसन्नता से को रिलेटेड है। Cell phones are totally addictive comparison machines that hijack our brains and turn US into anxiety riddled stress -addled, thin skinned versions of our best selves.
डाटा वैज्ञानिकों का कहना है कि रविवार के दिन लोग अधिक सकारात्मक शब्दों का उपयोग करते हैं । और बुधवार तक यह अपने निम्न स्तर पर पहुंच जाता है उसके बाद फिर सकारात्मकता बढ़ने लगती है इसलिए इस दिन के लिए कुछ अच्छी योजना तैयार करें।
९-change your habits घर पर स्वास्थ्य दायक भोजन करें महिलाओं पर हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि जब वह दोपहर में घर का बना खाना खाती हैं तो वह अधिक सकारात्मक भावनाएं और कम नकारात्मक भावनाएं महसूस करती हैं। यद्यपि किसी रेस्टोरेंट में जाना खिला पिलाकर सत्कार करने जैसा महसूस होता है फिर भी घर का खाना स्वास्थ्यकर है। और गुड फील के लिए ट्रिगर का काम करता है , यह एक स्वास्थ्य कर चुनाव है।
यदि आप बदलाव के लिए कम समय खर्च करते हैं यदि आप 20 मिनट भी रोज बदलाव या सजा के तौर पर जोड़ते हैं तो यह 550 डॉलर के बराबर जीवन संतुष्टि में कटौती के बराबर है। आपके शहर की स्थिति पार्क फुटपाथ और बाइक पाथ का उपयोग भी आपको खुश रखता है। जल के पास रहना अधिक खुशी देता है। पानी सकारात्मक भावनाओं को अनुभव कराता है । समुद्र का किनारा हमारे मनोवैज्ञानिक तनाव के स्तर को घटाता है।
१०-take care of your body जो लोग 6 घंटे से कम सोते हैं 7:30 से 9 घंटे सोने वालों की तुलना में कम खुश रहते हैं। अनियमित और डिस्टर्ब नींद तनाव तथा चिंता की पहली निशानी है। अनियमित विश्राम स्मृति को क्षीण करती है निर्णय लेने की क्षमता घटाती है। कार्य क्षमता को प्रभावित करती है और व्यवहार जनित समस्याएं पैदा करती है जो हमारे घर और कार्यस्थल के संबंधों पर प्रभाव डालती है। सीधे खड़े रहो । जो लोग सीधे खड़े रहते हैं वे टहलते समय भद्दी चाल चलने वालों की अपेक्षा अच्छे ऊर्जा स्तर तथा संपूर्ण जीवन दृष्टि से भी अच्छे होते हैं। जब हम व्यायाम कर रहे होते हैं तब यह अनुभव में नहीं आता फिर भी एक्सरसाइज मेक अस हैपियर । व्यायाम हमें अधिक प्रसन्न रखता है जो व्यक्ति प्रतिदिन 30 मिनट भी वर्कआउट करता है वह जो लोग वर्कआउट नहीं करते उनसे 30% अधिक खुश रहता है इतना ही नहीं अन्य अध्ययनों में पाया गया है कि 10 मिनट भी नियमित व्यायाम आपको प्रफुल्ल और आनंदित बनाता है।
ढेर सारा फल और सब्जियां खाना आपके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। एक कप कच्ची सब्जी या फल और आधा कप बनी हुई सब्जी शरीर की सामान्य आवश्यकताओं की पूर्ति -पर्याप्त विश्राम, नियत समय पर खाना और सोना संतुलित आहार और क्रियाशील जीवन पद्धति हमारे प्रसन्नता को बढ़ाते हैं।
घर से बाहर निकलो। घर से बाहर होना भी मूड बनाने का काम करता है। जो लोग 15 मिनट भी घर से बाहर बिताते हैं वह घर के अंदर रहने वालों की अपेक्षा 60% ज्यादा सकारात्मक भावनाएं रखते हैं। प्रकृति दर्शन चिड़िया देखना या पार्क में पिकनिक यहां तक कि घर के बगीचे की देखभाल करना भी कार्य के दबाव से मुक्त करता है। इतना ही नहीं प्रकृति से जुड़ाव व लगाव भी पैदा करता है। प्रकृति पर बनी डॉक्यूमेंट्री भी उतना तो नहीं फिर भी थोड़ा पिंच करती है।। प्रकृति सर्वोत्कृष्ट क्षण प्रस्तावित करती है। प्रकृति का सानिध्य आपको रोजमर्रा की कार्य व्यस्तता एवं धक्कम धक्का से ऊपर उठाकर आत्म-फीकापन को दूर करके एक उच्चतर वास्तविकता से जोड़ने का काम करती है। 1 मिनट तक ऊंचे वृक्षों को देखने से आप कम आत्म केंद्रित महसूस करते हैं। जब दूसरों की सहायता का अवसर आता है आप ज्यादा उदार व्यवहार प्रदर्शित करते हैं। खेलों में रुचि रखना अवसाद और मन के दुराव (स्वामित्व का हस्तांतरण) को दूर करके आत्मसम्मान को बढ़ाता है लेकिन बुद्धिमत्ता पूर्ण चुनाव करिए हारती हुई टीम यही लाभ नहीं दे सकती।
रिश्तो पर ध्यान दो
2019 में हुए अध्ययन का निष्कर्ष है की माता से पिता ज्यादा प्रसन्न रहते हैं वह शायद इसलिए कि घर का काम करने की बजाय वह अपने छोटे बच्चों के साथ ज्यादा खेलते हैं। मां ज्यादा अनुशासन पसंद होती है और पिता क्रीड़ा पसंद। इसलिए मां को भी पिता के समान बच्चों के साथ ज्यादा खेल पूर्ण होना चाहिए इसी प्रकार पिता को भी अनुशासन प्रक्रिया में सहभागिता निभाना चाहिए ठीक मां के बराबर ही। हार्वर्ड के साइकेट्रिस्ट राबर्ट वाल्डिंगर कहते हैं मजबूत संबंध प्रसन्नता की कुंजी है स्ट्रांग रिलेशनशिप्स आर की टू हैप्पीनेस। चाहे वह संबंध माता-पिता का हो बच्चों का हो दोस्तों का हो या सहकर्मियों का हो या अन्य लोगों की सहायता का हो। हमें यह याद रखना चाहिए की जीवन में महत्वपूर्ण क्या है हमारे लिए स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है फिर भी हम एक दूसरे पर निर्भर हैं। इसलिए तुम अपने चारों ओर घिरे व्यक्तियों द्वारा परिभाषित किए जाते हो बहुधा अपने परिवार द्वारा जो तुम्हारा सबसे बड़ा संबल है।
११-बहिर्मुखी व्यवहार करो चाहे तुम वह नहीं हो । जब अंतर्मुखी लोगों ने बताया कि जब वे बहिर्मुखी व्यवहार करते हैं वे ज्यादा प्रसन्न अनुभव करते हैं। निपट अकेलापन चाहने वाला भी जब बस में अजनबी यों से मिलता है बात करता है या चैट करता है उनकी प्रसन्नता बढ़ती है।
वह कार्य करो जो तुम्हारे जीवन को अर्थपूर्ण करें
रोजमर्रा की सांसारिक बातों का रोजनामचा या डायरी लिखना भी व्यक्ति को खुश बनाता है इसलिए एक डायरी रखो और समय-समय पर इसे पढ़ते रहो होता क्या है जीवन की छोटी-छोटी खुशियों के क्षण और वे चीजें जो हमें खुशी देती हैं उन्हें भूलते जाने की हमारी आदत होती है लेकिन उन सामान्य क्षणों को लिपि बंद करना हमें उन्हें फिर से खोज लेने का अवसर प्रदान करती है।
यद्यपि तुम भूल नहीं पा रहे हो फिर भी क्षमा कर दो। ईर्ष्या को पकड़े रहना भी तनावपूर्ण है यह तुम्हें क्रोधित दुखी उत्तेजित और नियंत्रण से बाहर कर देता है लेकिन जिसने तुम्हें पीड़ा पहुंचाया उसे माफ कर देना इन सभी नकारात्मक भावनाओं को निर्मित ही नहीं होने देता।
इसी साल नेल पसरिचा की पुस्तक यू आर अवेसम प्रकाशित हुई है जिसमें व लिखते हैं कि किसी उपन्यास के 20 पेज रोज पढ़ना भी तुम्हें ज्यादा खुश रखेगा साहित्यिक गल्फ कथा पढ़ना मस्तिष्क की गतिविधियों को बढ़ा देता है और तुम्हारी समझ तुम्हारी करुणा तुम्हारी सहानुभूति में भी विस्मयकारी वृद्धि करता है लेकिन छपे अक्षरों को पढ़ो स्क्रीन टाइम को घटाओ।
अपने उद्देश्य का हिसाब लगाओ या भविष्य में तुम जिस पथ पर चलोगे यावे सिद्धांत जिस पर तुम्हारा जीवन निर्भर करेगा या कोई लक्ष्य जिसे तुम प्राप्त करना चाहते हो इस बारे में है। यह एक बड़ा लक्ष्य जैसे राजनीति में शामिल होना या ज्यादा निजी लक्ष्य एक अच्छा पिता होना या दूसरे मार्ग से तुम्हारे चारों ओर तुमसे श्रेष्ठ जो है उसके हिसाब से खुद को अभी प्रेरित करना और उन गतिविधियों को संगठन एवं संचालन करना जिससे तुम अपना लक्ष्य हासिल कर सको कुछ भी हो सकता है।
नकारात्मक भावनाओं को एक अवसर की तरह सोचो
। यह जानना महत्वपूर्ण है कि नाखुशी भी जीवन अनुभव का एक सामान्य हिस्सा ही है।हम लक्ष्य प्राप्ति के लिए कठोर प्रयास और कठिन संघर्ष करते हैं हमारा दिल तोड़ दिया गया है हम इच्छा अनुसार तीव्र प्रगति के मार्ग में बाधा खड़ी पाते हैं इन सब पर नियंत्रण पाना ही हमें दोनों बनाता है मनुष्य और प्रसन्न बहुत ह्यूमन एंड हैप्पी।
इसलिए अपने तनाव को देखने के नजरिए पर पुनर्विचार करिए। तनावपूर्ण स्थितियां हमें पीड़ित जैसा अनुभव कराती हैं लेकिन एक समस्या को हल करने वाली मानसिकता हमें मजबूत बनाती है जिस क्षण से आप समस्या को हल करने की दिशा में कदम बढ़ाते हैं आप स्थितियों को सकारात्मक नियंत्रण में पाते हैं। हमेशा याद रखो तनाव हमेशा एक बुरी चीज नहीं है। यह इस अर्थ में लाभकारी है कि यह काम के प्रति आपका ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है चुनौतियों का सामना करने के लिए आपको तैयार करता है और आपको समस्या के हल तक पहुंचाता है लेकिन तनाव तब अकड़न में बदल जाता है जब हाथ में लिया गया काम स्मृति और निर्णय लेने की क्षमता पर प्रभाव डालने लगे तनाव पर नियंत्रण के लिए मन को शांत रखने के लिए विचार पूर्वक सोचिए और पेट नाभि से सांस लेने का अभ्यास कीजिए अभी और यहीं। Concentrating here and now....



