Friday, 5 November 2021
"एहरो तोहीं के देखय के हऽ"। श्री स्वामी धर्मात्मा नन्द जी महाराज ५/११/२०२१
Monday, 18 October 2021
Saturday, 18 September 2021
परमारथ के कारने साधुन धरा शरीर
Saturday, 11 September 2021
हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में है। -----------------विमलानन्द बाई जी 11/09/21
Saturday, 31 July 2021
Monday, 21 June 2021
ट्रस्ट की स्थापना

Thursday, 10 June 2021
।। घर का जोगी जोगड़ा।।
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| महाशिवरात्रि पर गुरु-शिष्य |
तन को जोगी सब करें मन को करे न कोय।सब विधि सहजै पाइये जो मन जोगी होय।।
संत कऽ हाल भगवंत न जानैं।सोहमस्मि इति वृत्ति अखण्डा।
Sunday, 2 May 2021
मेरे बाद कोई गुरु गद्दी पर नहीं बैठेगा
आज दिनांक 2 मई 2021 को श्री स्वामी धर्मात्मानन्द जी महाराज परमहंस ने सभी साधुओं+(बैरागानंद,ध्यानानंद,दर्शनानंद,घरभरनानंद,सबेरानंद,शांतानंद,सुधानंद,सोहनबाबा, कन्हैयाबाबा, गोरख बाबा,योगयुक्तानंद,विमलानंद, नित्यानंद) तथा भक्तों+(संदीप, राजकुमार,छ़ोटू, नगीना, राधेश्याम, संतोष सिंह,रामलगन, चन्द्र जीत, राजकुमार वकील) के सामने कहा देखाा हमार तऽ कहना ई हऽ केहू गद्दी कऽ मालिक ना बनी गद्दी कऽ मालिक बनय में बड़ी झगड़ा हऽ। खेती कयल सपरी तऽ करिहा जा ,ना सपरी तऽ अधिया दे के खइहा जा ।नाहीं सपरी तऽ कुल जानी हाथे-हाथ््््््््््््््््््््््््््््््
Thursday, 8 April 2021
Love is powerful.Love is wonderful.
Wednesday, 7 April 2021
दैनन्दिनी
दैनन्दिनी को आजकल कहते हैंडायरी।
डायरी लेखन साहित्य की एक विधा मान्य है। मैं शुरू से ही डायरी लेखन करता हूं।नाम दिया है""तेरी मेरी कहानी""
२३मार्च से ३०मार्च२०२१
यह २५ मार्च जूड़ा हरधन चन्दौली उ0प्र0 सतगुरु अभिनन्दन समारोह की एक स्मृति है।इस दिन की नई बात है महाराज जी के कहने पर विमला बाई जी द्वारा मेरा तिलक। और मेरे द्वारा बाई जी को जय सच्चिदानन्द का अभिवादन करना। उसके बाद हम अलग अलग वाहन से जूड़ा हरधन पहुँचे। वहां गुलाब द्वय ने अर्ध्य पाद्य से श्री स्वामी धर्मात्मानन्द जी महाराज परमहंस का अभिनन्दन किया।
शाामको तीन बजे आरती हुई।आरती के साथ ही गुुुुरदेव मुख््य््याश्रम चलने के लिए ााााआसन से चल दिए।
२७मार्च को जूड़ा हरधन के लोग यज्ञशेष लेकर मुख्याश्रम आत्मानुसंधान केन्द्र कल्याणपुरी बहरवानी में हाजिर हुए।।
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| श्री स्वामी जी को उबटन लगाते मैं और सबेरानंदजी |
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| 10मार्च2021को आश्रम के गेहूं की थ्रेसिंग की सेवा में लगा। |
संत और महंत कौन?
प्रेम जब अनन्त से हों गया
रोम रोम संत हो गया।
देवालय बन गया यह बदन
हृदय तो महन्त हो गया।
तात भरत तुम सब विधि साधू।
राम चरन तव प्रीति अगाधू।।
अपने राम के चरण कमलों में जिसका अगाध अथाह प्रेम है,वह हर प्रकार से साधु ही है।
संत सरल चित् जगत हित,ये दोनों बातें जिसमें हैं पहला निर्मल मन और दूसरा जगत के कल्याण की भावना वह संत हैं।
हेतु रहित जग जुग उपकारी।
तुम तुम्हार सेवक असुरारी।।
दरिया लच्छन साधु का,का गिरही का भेष।
निरपक्षी निर्द्वंद्व रह बाहर भीतर एक।। संत स्वभाव है,स्टेट आफ माइंड है, चित्त की दशा है।
संत न छोड़ै संतई,कोटिक मिलैं असंत।
मलय भुजंगहि बेधिया, शीतलता न तजंत।।
तब कहते हैं कि "संत कऽ हाल भगवंत न जानैं।।"
तब कहते हैं कि" सांतव सम मोहि मय जग देखा।मोतें अधिक संत करि लेखा।।"
आज कल का हाल है"जिसके संग दस पाँच हैं तिनका नाम महंत।।"
Wednesday, 24 March 2021
Friday, 19 March 2021
गुरु चरणामम्बुज निर्भर भक्त ः
अति आनंद उमगि अनुरागा।चरन सरोज पखारन लागा।।
तुम्ह तें अधिक गुरहि जियँ जानी।सकल भायँ सेवहिं सनमानी।।
महाशिवरात्रि पर गुरु-शिष्य
गुरु के बचन प्रतीति न जेही।सपनेहुँ सुगम न सुख सिधि तेही।।
तजउँ न नारद कर उपदेसू।आपु कहहिं सत बार महेसू।।
नारद बचन न मैं परिहरऊँ।बसउ भवनु उजरउ नहिं डरऊँ।।
गुरु हमारे बानियां कि सूखी भौंरी देंय।
नमक मिर्च मांगूँ नहीं कि ईह़ो जिन ले लेंय।।
रज़ा पर राजी रहने वाले इसी तरह सोचते हैं।
कर सरोज प्रभु मम सिर धरेऊ। दीनदयाल सकल दुख हरेऊ।।
निज कर कमल परसि मम सीसा।हरषित आसिष दीन्ह मुनीसा।।
राम भगति अविरल उर तोरें।बसिहि सदा प्रसाद अब मबिलोकनि
मामवयलोकय पंकज लोचन। कृपा बिलोकनि सोच बिमोचन।।
सुकृति संभु तन विमल विभूती। मंजुल मंगल मोद प्रसूती।
जन मन मंजु मुकुर मल हरनी।किएँ तिलक गुन गन बस करनी।।
श्रीगुर पद नख मनि गन ज्य़ोति।सुमिरत दिव्य दृष्टि हियँ होती।।
गुरु पद रज मृदु मंजुल अंजन।नयन अमिय दृग दोष विभंजन।।














































