Friday, 5 November 2021

"एहरो तोहीं के देखय के हऽ"। श्री स्वामी धर्मात्मा नन्द जी महाराज ५/११/२०२१

वर्ष २०२१की दीपावली ०५नवम्बर को पड़ी।
मैं चूरा और ५किलो गुड़ के प्रसाद के साथ ५००रुपये का झालर बत्ती लेकर दीपावली से एक दिन पहले ही आश्रम पर पहुंच गया। नारायण जी एवं सुनील जी के सहयोग से सतगुरु के आसन को झालर बत्ती से सजाया।
दीपावली को काजू बादाम किशमिश और गरी के प्रसाद के साथ शाम की आरती में शामिल हुआ।
आरती भजन के बाद श्री स्वामी जी के साथ सेल्फी और फोटो सेशन हुआ। महाराज जी ने कहा "यादगारी रही,बच्चू!"
        सच में इस बार की दीपावली यादगार रही।

दीपावली के दूसरे दिन हमने धान कटाई की सेवा किया।

गोवर्धन पूजा के दिन आरती के बाद मैं श्री स्वामी जी को उनके कक्ष तक छोड़ने गया।
     श्री स्वामी जी ने मुझसे कहा जल्दी शादी ब्याह करके खाली हो जा बच्चू!एहरो तोहीं के देखय के हऽ।।

Saturday, 18 September 2021

परमारथ के कारने साधुन धरा शरीर

हरियान गरुड़ ने काग भुसुण्डी जी से पूछा जब आपको इच्छा मृत्यु का वरदान मिला है तो आप शरीर क्यों धारण किए रहते हैं मोक्ष क्यों नहीं प्राप्त कर लेते? कागभुसुंडि जी ने कहा ,"तजउं न तन निज इच्छा मारना।तन बिना वेद भजन नहीं बरना।।"
कबीर ने कहा है वृक्ष कबहु नहीं फल भखै ,नदी   न संचय नीर। परमारथ के कारण साधुन धरा शरीर।।
18 सितंबर 2021की शाम को श्री स्वामी जी के शारीरिक अस्वस्थता के कारण उन्हें हेरीटेज अस्पताल वाराणसी में भर्ती करना पड़ा।
शरीर अस्वस्थ हैं।आक्सीजन लेवल कम ज्यादा हो रहा है।13सितम्बर2021को कोविशील्ड की पहली डोज लग गई थी।अब फेफड़े में संक्रमण के कारण साँस लेने में दिक्कत हो रही है।
रात में श्री स्वामी जी ने कहा"आज अगोरिहा जा।"
बाई जी, छोटे लाल, राजकुमार और मैं हेरीटेज अस्पताल के उस कक्ष में बारी बारी से जागने के लिए उपलब्ध हैं। ड्राइवर बाबा और गुलाब द्वय नीचे प्रतीक्षालय में मौजूद हैं।भोर में ४/१५पर बाई जी राजकुमार से कहती हैं कि अब आप जगह दीजिए संदीप भगत रात भर नहीं सोये हैं वे हो लें नहीं तो उनका शुगर बढ़ जाएगा। राजकुमार कहते हैं रोज़ सुतबय न करय लँ,एक दिन नहिंयय सुतीहँय तऽ का हो जाई। फिर मुझसे कहते हैं, चलिए सारनाथ चला जाय,इन लोगों को खाना भी भिजवा दिया जाएगा और आप भी आराम कर लेंगे। राधिका बाईऔर शांति मावा ने खाना बनाया और आनंद तथा गुरुदयाल लेकर गए।ज्योति ने पूछा"बाई जी कह रही हैं कि पिंकी अकेली है, तूं भी आ जा,का करीं ,आईं?"
मैंने कहा"आ जा।"

मैं एक रतजगा की सेवा से ही कृतार्थ अनुभव कर रहा हूं।सब अपने हिस्से की सेवा कर धन्य हों।
नाथ सकल संपदा तुम्हारी।
मैं सेवक समेत सुत नारी।।
सभी गुरुभ्राताओं की यह भावना रहती है-
मैं सेवक गुरु पद,पद मोरा।
अस अभिमान जाय नहिं भोरा।।

Saturday, 11 September 2021

हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में है। -----------------विमलानन्द बाई जी 11/09/21

आज दिनांक 11/09/21को राजकुमार पंच प्यारे का चयन करना चाहते थे। पहले वह श्री स्वामी जी से पांच समर्पित भक्तों के चुनाव के लिए कह रहे थे जो जरूरत पड़ने पर अपनी किडनी दान कर सकें।श्रीस्वामी जी ने कहा मालिक एही के ठीक कर दें बच्चू,हम केहू के ना कहब।
राजकुमार ने बाई जी से चुनने को कहा तो उन्होंने कहा यह तो मालिक न बताएंगे कि मैं कैसे बताऊं? मैंने कहा आप मेरा, राजकुमार या किसी अन्य का का नाम नहीं ले सकतीं यहां तक तो ठीक है लेकिन आप पूछने पर अपना नाम तो आगे कर सकती थीं? उन्होंने कवई काटते हुए कहा मैं देना चाह कर भी क्या करूंगी लेने वाला स्वीकार करेगा तब न! मैंने कहा यह तो बाद की बात है पहले आपको अपना नाम तो आगे करना चाहिए था। उन्होंने कहा यह बात पहले ही हो चुकी है उनका इशारा था कि महाराज जी उनके नाम का प्रस्ताव रिजेक्ट कर चुके हैं।
फिर उन्होंने कहा एक गाना में कहते हैं न कि
वक्त आने दे तुझे,,,,,,,,,,,,हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में है,,,,,,,,,,, देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है।
मैं विस्मिल की पंक्तियां दुहराता हूं
उन्होने "देेखना है जोर कितना बाजुए कातिल में हैै"
इस ठसक से कहा कि उनका अति आत्मविश्वास अहं की सीमा को छूता हुआ अनुभव हुआ।
इस पूरी कवायद में एक सोची समझी रणनीति की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
मैंने राजकुमार से पूछा कि महाराज जी परीक्षा लेना चाहें तो उनका अधिकार है उस पर कोई बस नहीं लेकिन आप क्यों भक्तों की परीक्षा लेना चाहते हैं? उन्होंने कहा मैं परीक्षा नहीं ले रहा हूं मैं चाहता हूं कि अब जब महाराज जी दिल्ली जायं तो पांच लोग मेरे पीछे रहें ताकि जरूरत पड़ने पर वह तन मन से उपलब्ध रहें।
तो गुरु भाइयों और बहनों वक्त की नजाकत को समझते हुए तैयार रहें।
मालिक सबका मंगल करें।

Monday, 21 June 2021

ट्रस्ट की स्थापना



आज दिनांक 20/06/2021 सन को श्री स्वामी जी ने ट्रस्ट के आजीवन सदस्य चुना सभी साधुओं के बाद मिथिलेश संदीप संजय नगीना राजकुमार का नाम लिखवाया, मैंने संदीप का नाम लिस्ट में नहीं लिखा
क्योंकि संदीप इस पूरी व्यवस्था से अलग रहना चाहते हैं कारण कि16 जनवरी सन् 2011की दोपहर गुरदेव ने मुझसे कहा "जब से बनारसी की मौत हुई है मुझे लगता है कि किसी की मौत कभी भी हो सकती है.
मेरे न रहने पर साधुओं में पुजाने की होड़ लग सकती है ऐसे में वे मेरी समाधि बनवाने तथा भण्डारा करने से कतरा सकते हैं.सबकी ईमानदारी भी मेरी जानकारी से बाहर नहीं है.
मैं अपनी चल सम्पत्ति का नामनी तुम्हें बनाना चाहती हूँ. तुम फार्म ले आओ, मैं काम कर दूँ. प्राक्षित का धन है उससे मेरी समाधि बनवा देना और भण्डारा कर देना. जेकर जेतना शक्ति भक्ति रही ऊ ओतना पुजवाई, हम गद्दी कऽ उत्तराधिकारी ना बनाइब."
मैंने कहा"हमरे नामें काहें? "
"एसे कि तू समाधि भण्डारा कऽ काम करबा. सुरेश सुबेदार कऽ नाम भी डलवा देवय के" श्री स्वामी जी ने कहा.
31 जनवरी 2011 को उन्होंने कहा "बुढवन कऽ नाम का रही, आ राजकुमार कहत  रहलँ  हऽ कि एक जानी के नामे भी ना रहय ऊ फार्म ली अइहैं आ शिकार, भण्डारी, कोठारी सबके नामे कय देहीं.;"
इसके बाद मुझे सहखातेदार आइदर आर और सूबेदार भण्डारी ड्राइवर को अलग अलग खातों में नामिनी बनाया गया.
आठ साल बाद मार्च 2019 में सबसे पहले मैं बेदखल हुआ खाता बंद कराकर फिर भण्डारी ड्राइवर का भी वही हाल किया गया.
आज की तारीख में विमलानंद सहखातेदार इंडियन ओवरसीज बैंक सकलडीहा और बवाल    fd के नमिनी हैं जून 2021 में मुझे सुनाकर उनसे कहा गया तोहके नामिनी बना देहले हईं हमार समाधि बनवा दीहा.सूबेदार नामिनी हैं बचत खाते मेंUBIसकलडीहा में। 
इसप्रकार अब तीन बचे. तेरह की लिस्ट में आठवें नंबर पर महाराज जी ने मेरा नाम लिया और नौवें पर मिथिलेश का. मैंने अपना नाम सूची में दर्ज नहीं किया. कयोंकि दर्ज नाम खारिज होने पर दर्द देता है.
एक ही दर्द क्या कम है? जो दूसरा भी लेने की तैयारी करूँ? 
"दिल दिया दर्द लिया" इतना ही काफी है.
फिर 27 सितम्बर 2024 को ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन हुआ और इस बार भी आठवें नंबर पर मेरा नाम दर्ज हुआ। मुझे छोड़ कर सारे नाम संन्यासियों के हैं । मेरी हठधर्मिता के कारण गोरख की जगह मेरा नाम दर्ज किया गया। 




Thursday, 10 June 2021

।। घर का जोगी जोगड़ा।।


जित पवन मन गो निरस कर मुनि ध्यान कबहुंक पावहीं

 

महाशिवरात्रि पर गुरु-शिष्य
घर का जोगी जोगड़ा आन गांव का सिद्ध।
    पहले जोगड़ा की बात कर लेते हैं। वैदिक हिंसा हिंसा न भवति में भारतेंदु हरिश्चंद्र का व्यंग है
यहि असार संसार में चार वस्तु है सार।
जुआ मदिरा मांस और नारी संग विहार।।
जो इस आदर्श को मानने वाला और उसका पोषक है वही जोगड़ा है। जोगड़ा कहते हैं" पैसा खुदा नहीं पर खुदा की कसम खुदा से कम भी नहीं!"
जोगड़ा कहता तो जोगी जैसा ही है किंतु करता नहीं है
कहता है करता नहीं मुंह के बड़े लबार।
तिन के मुंह काला होइहैं साहब के दरबार।।
प्रसिद्ध कवि अशोक चक्रधर ने लिखा है
दुखों का तभी अंत होता है 
जब प्राणी अंदर से संत होता है। 
मोह हो न माया,
तो कैसे टिकेगा दुख का साया,
दुखों का इसीलिए अंत नहीं है
क्योंकि कोई भी तो संत नहीं है।। 
जोगड़ा की एक और विलक्षण पहचान है
लंबा टीका मधुरी बानी।
दगाबाज की यही निशानी।।
जोगड़ा तो कभी-कभी असली जोगी को भी अपने कुशल नाटकीय अंदाज से बहुत पीछे छोड़ देता है। जोगड़ा आदर्श का हव्वा खड़ा करता है-
वह आदर्श का हउवा निकला
कोकिला समझा जिसे कउवा निकला
जो भी शराब के विरोध में बोला
उसके जेब से पउवा निकला।।
जोगड़ा एक विशेष बात का विशेष प्रचारक है
हाथी घूमे गाँव -गाँव
जेकर हाथी ओकर नाँव।!
100 सौ जूता खाए तमाशा घुस के देखें। समस्त कुशलता के बाद भी जोगड़ा अंत में पहचान ही लिया जाता है--बोलत ही पहचानिए साहू चोर की घाट/अन्तर घट की करनी निकरे मुख की बात।।आइए अब बिन्दु जी महाराज से तोता मैना का संवाद सुनते हैं तोता एक नंबर का जोगड़ा है और मैना जोग की उपदेशक-
मैना-अरे तेरी एक श्वांस अमोल।
         रे मन तोता हरि हरि बोल।।
तोता_रसना ज्ञान कथा मत खोल ।
मैंना जग उपवन में डोल ।
रंग रंग के फूल खिले हैं ।
बड़े भाग से भोग मिले हैं ।
सुख साधन के सुफल बने हैं ।
सदानंदमय अमृत ढले हैं ।
सबके स्वाद टटोल ।
मैना जग उपवन में डोल।।
मैना-सपने में एक बाग लगाया ।
फूल फलों में मन ललचाया ।
जब छूने को हाथ बढ़ाया ।
जाग पड़ा कुछ भी नहीं पाया।
 यथा ढोल में पोल ।
रे मन तोता! हरि हरि बोल।।
तोता-यदि सपना है जग उपासना।
जीवन स्वप्न है स्वप्न वासना।
अपने को क्या स्वप्न कल्पना।
सपने से सपना है अपना।
इस विचार को तोल।
मैना!जग उपवन में डोल।।
मैना-इस भ्रम में मत बन मतवाला ।
यह तन अमर प्रेम का प्याला ।
जिसमें सब स्वरूप रस डाला ।
तू रस का है पीने वाला ।
विष का बिंदु न घोल ।
रे मन तोता हरि हरि बोल।।
जोगड़ा होना आसान है जोगी होना कठिन है पलटू दास जी कहते हैं
पलटू जे संजम करै, करै रूप से  भोग।
रण का चढ़ना सहज है ,मुश्किल करना जोग।।
    आइए अब थोड़ा सिद्ध की बात कर लेते हैं सदगुरु श्री स्वामी धर्मात्मानंद जी महाराज परमहंस कहते हैं "
दूसरे कऽ सिद्धि कय दिन काम देही?"
सद्गुरु की सयानी सीख में भी स्पष्ट कहते हैं" हम सिद्ध हईं
तऽ तोहके का ?तुम्हारी आत्म-सिद्धि ;तुम्हारा आत्मसाक्षात्कार ही तुमको काम आएगा !किसी दूसरे का नहीं! दूसरे की सिद्धि उसके काम आएगी ;तुम्हारे नहीं!"

कबीर ने सहज विश्रांति अथवा परम कैवल्य को सिद्धा वस्था कहा है
गोरख सोई ज्ञान गमि गहै।
 
महादेव सोई मन की लहै।।
सिद्ध सोई जो साधै इति।
नाथ सोई जो त्रिभुवन जती।।
इतना ही नहीं वह आगे कहते हैं
   आपा भजबा सतगुरु खोजीबा जोग पंथ न करबा हेला ।।फिरी फिरी मनीषा जन्म ना पाई बा करीला सिद्ध पुरुष  सूँ मेला।।
जोग जुक्त जब पाओ ज्ञान ।
काया खोजो पद निर्वाण।।

जोगी सो जो राखै जोग।जिभ्या इन्द्री करै न भोग
अंजन छांड़ि निरंजन रहै।ताकू गोरख जोगी कहै।।
ब्यंद ही जोग ब्यंद ही भोग।ब्यंद ही हरै चौंसठि रोग।
या बिंद का कोई जानै भेव।सो आपै करता आपै देव।।
बिंद कऽ हाल गोबिंद न जानैं।
इस जनश्रुति का आधार गोरख बानी है न कि जतिद्वेष!
धन जोबन की करै न आस,चित्त न राखै कामिनि पास।
नाद बिंद जाके घट जरे,ताकी सेवा पारबती करै।।
और अन्त में-
कहैं कबीर एक मुंगरी गढ़ावा।
जे जैसे मानै ओके वैसे मनावा।।    
    हमने जो कहानी सुनी थी उसमें भाई ज़ोगी होकर बहुत दिनों बाद घर लौटता है। दूसरा भाई सम्पत्ति में हिस्सा लेंगे ऐसा सोचकर सम्मान नहीं करता।कुछ दिन बाद एक दूसरा जोगी गांव में आता है। यही भाई जो अपने जोगी भाई का कुशल क्षेम भी नहीं पूछता उस जोगी की खूब आवभगत करता है। आवभगत शब्द ही भगत की स्पेशल ट्रीट के लोकाचार से बना है।
 जब घर आया जोगी उस जोगी से मिलने पहुंचा तो पता चला कि वह तो इसका ही शिष्य है।
  तभी से यह कहावत है
घर का जोगी जोगड़ा आन गांव का सिद्ध।
     

तन को जोगी सब करें मन को करे न कोय।सब विधि सहजै पाइये जो मन जोगी होय।।
संत कऽ हाल भगवंत न जानैं।
सोहमस्मि इति वृत्ति अखण्डा।
दीपशिखा सोइ परम प्रचण्डा।।


Sunday, 2 May 2021

मेरे बाद कोई गुरु गद्दी पर नहीं बैठेगा


आज दिनांक 2 मई 2021 को श्री स्वामी धर्मात्मानन्द जी महाराज परमहंस ने सभी साधुओं+(बैरागानंद,ध्यानानंद,दर्शनानंद,घरभरनानंद,सबेरानंद,शांतानंद,सुधानंद,सोहनबाबा, कन्हैयाबाबा, गोरख बाबा,योगयुक्तानंद,विमलानंद, नित्यानंद) तथा भक्तों+(संदीप, राजकुमार,छ़ोटू, नगीना, राधेश्याम, संतोष सिंह,रामलगन, चन्द्र जीत, राजकुमार वकील) के सामने कहा देखाा हमार तऽ कहना ई हऽ केहू गद्दी कऽ मालिक ना बनी गद्दी कऽ मालिक बनय  में बड़ी झगड़ा हऽ। खेती कयल सपरी तऽ करिहा जा ,ना सपरी तऽ अधिया दे के  खइहा जा ।नाहीं सपरी तऽ कुल जानी हाथे-हाथ
््््््््््््््््््््््््््््््

Thursday, 8 April 2021

Love is powerful.Love is wonderful.

 

Love is both light and power.





Love     एक ऐसा लफ्ज़ जिससे पोथियां भरी हुई हैं। आधुनिक मनोविज्ञान भी जिसपर लगातार अनुसंधान किए जा रहा है। विभिन्न देशों के तीन लाख लोगों पर रिसर्च कर उसका निष्कर्ष है कि प्रेम और मित्रता आपके जीवन की लम्बाई बढ़ाने में सहायक होता हैlLive Long.
और यह किसी आध्यात्मिक प्रेम पर आधारित खोज निष्कर्ष नहीं है।मात्र मानवी प्रेम और मित्रता!
क्या है माजरा?
रसायन!
वेद कहते हैं"रसौ वै सः"
वह रस रूप है।रस ही है। वह रस है तो आप?आप भी तो वही हैं।क््य्कि वेदांत कहते हैं" तत्त्वमऽसि" वह तुम हो। 
सो तैंंंताहिििििितोहिं
सोतैं ताहि तोहिं नहिं भेदा।
बारि बीीी इव गावहिं वेदा।।
इस लिए सूूीफी सांसारिक प्रेम को भगवत प्रेम की पहली सीढ़ी माााे

Wednesday, 7 April 2021

दैनन्दिनी




 दैनन्दिनी को आजकल कहते हैंडायरी।

डायरी लेखन साहित्य की एक विधा मान्य है। मैं शुरू से ही डायरी लेखन करता हूं।नाम दिया है""तेरी मेरी कहानी""

२३मार्च से ३०मार्च२०२१


यह २५ मार्च जूड़ा हरधन चन्दौली उ0प्र0 सतगुरु अभिनन्दन समारोह की एक स्मृति है।इस दिन की नई बात है महाराज जी के कहने पर विमला बाई जी द्वारा मेरा तिलक। और मेरे द्वारा बाई जी को जय सच्चिदानन्द का अभिवादन करना। उसके बाद हम अलग अलग वाहन से जूड़ा हरधन पहुँचे। वहां गुलाब द्वय ने अर्ध्य पाद्य से श्री स्वामी धर्मात्मानन्द जी महाराज परमहंस का अभिनन्दन किया।


शाामको तीन बजे आरती हुई।
आरती के साथ ही गुुुुरदेव मुख््य््याश्रम चलने के लिए ााााआसन से चल दिए।


२७मार्च को जूड़ा हरधन के लोग यज्ञशेष लेकर मुख्याश्रम आत्मानुसंधान केन्द्र कल्याणपुरी बहरवानी में हाजिर हुए।।
यज्ञशेष का एक अंश
२८मार्च२०२१आज होलिका दहन है। परंपरा है कि आज उबटन लगाकर झिल्ली को होलिका की ज्वाला में इस भाव से दहन किया जाता है कि इसी के साथ हमारे सभी दुःख दारिद्र्य और क्लेश कलह तथा नास्तिकता भी दग्ध हो जाय।
पारसाल भी इस अवसर पर छोटू और मैं श्रीीीेेेगणेश किए जिससे प््र््््ने 
अपने 
श्री स्वामी जी को उबटन लगाते मैं और सबेरानंदजी
इस बार महाराज जी उबटन लगवााने में आनाकानी कर रहे थे।सबेेेेरानराानंद और मैने होोी जगाया"मंगले बनिया गुड़ न दे,मुंंंंह मलिअऊले भेली दे"!
10मार्च2021को आश्रम के गेहूं की थ्रेसिंग की सेवा में लगा।
21 जूू 21को श््र स्वामी जी ने कहा ट्रस्ट की स्थापना के लिए आजीवन सदस्य चुनना है, आ जाओ. मैं पहुँच गया, स्वामी जी ने सभी साधुओं का, मेरा तथा मिथििलेश का नाम मुझे  लिखने को कहा.अपन छोोोड़ कर Sab Ka Naam likh diya Maharaj Ji Ne Nagina Sanjay aur Rajkumar ka naam Khud Unse likhva. 
Aaj dinank 25 June 2021ko aashram Mein ropani Shuru आज05मार्च2023को पुनः जूड़ा दौड़ा पर बाई जी ने श्री महाराज जी के बाद छोोो के कहने पर उसको और मुझे टीका लगाया। उसके पहले 08फरवरी2023को महाशिवरात्रि पर स्वयंश्ररीी स्वााा जी ने मुझे केशर तिलक लगायामीम

संत और महंत कौन?

प्रेम जब अनन्त से हों गया

रोम रोम संत हो गया।

देवालय बन गया यह बदन

हृदय तो महन्त हो गया।



 तात भरत तुम सब विधि साधू।

राम चरन तव प्रीति अगाधू।।

    अपने राम के चरण कमलों में जिसका अगाध अथाह प्रेम है,वह हर प्रकार से साधु ही है।

संत सरल चित् जगत हित,ये दोनों बातें जिसमें हैं पहला निर्मल मन और दूसरा जगत के कल्याण की भावना वह संत हैं।

हेतु रहित जग जुग उपकारी।

तुम तुम्हार सेवक असुरारी।।

दरिया लच्छन साधु का,का गिरही का भेष।

निरपक्षी निर्द्वंद्व रह बाहर भीतर एक।। संत स्वभाव है,स्टेट आफ माइंड है, चित्त की दशा है।

संत न छोड़ै संतई,कोटिक मिलैं असंत।

मलय भुजंगहि बेधिया, शीतलता न तजंत।।

तब कहते हैं कि "संत कऽ हाल भगवंत न जानैं।।"

तब कहते हैं कि" सांतव सम मोहि मय जग देखा।मोतें अधिक संत करि लेखा।।"

आज कल का हाल है"जिसके संग दस पाँच हैं तिनका नाम महंत।।"


Wednesday, 24 March 2021

किए तिलक गुन गन बस करनी




 आज दिनांक 25/03/2021को जूड़ा हरधन चन्दौली
 के दौरा केे पूर्व बाई जी महाराज जी को तिलक कर रहीं थीं।श्री स्वामी जी ने कहा संदीप के भी टीका लगा दे।विमलानन्द जी ने मुझे टीका लगाया।


Friday, 19 March 2021

गुरु चरणामम्बुज निर्भर भक्त ः


गुरु बहुरंगी सर्वसंगी

भूत दया द्विज गुर सेवकाई।विद्या बिनय विवेक बड़ाई।।
जहँ लगि साधन वेद बखानी।सब कर फल हरि भगति भवानी।।

नाथ आजु मैं काह न पावा। मिटे दोष दुख दारिद दावा।।
जो इच्छा करिहहु मन माहीं। गुरु प्रसाद कछु दुर्लभ नाहीं।।
अति आनंद उमगि अनुरागा।चरन सरोज पखारन लागा।।
करि प्रेम निरंतर नेम लिएँ।पद पंकज सेवत सुद्ध हिएँ।।
तुम्ह तें अधिक गुरहि जियँ जानी।सकल भायँ सेवहिं सनमानी।।
क सूल मोहि बिसर न काऊ। गुरु कर कोमल सील सुभाऊ।।
 



                   महाशिवरात्रि पर गुरु-शिष्य

गुरु के बचन प्रतीति न जेही।सपनेहुँ सुगम न सुख सिधि तेही।।

तजउँ न नारद कर उपदेसू।आपु कहहिं सत बार महेसू।।

नारद बचन न मैं परिहरऊँ।बसउ भवनु उजरउ नहिं डरऊँ।।

गुरु हमारे बानियां कि सूखी भौंरी देंय।

नमक मिर्च मांगूँ नहीं कि ईह़ो जिन ले लेंय।।

रज़ा पर राजी रहने वाले इसी तरह सोचते हैं।

गुरु और शिष्य की एक कहानी यह भी है-
गुरु ने कहा किन्तु चेला न माना।
गुरु को विवश हो पड़ा लौट जाना।।
गुरु जी गए रह गया किन्तु चेला।
यही सोचता हूँगा मोटा अकेला।।



कर सरोज प्रभु मम सिर धरेऊ। दीनदयाल सकल दुख हरेऊ।।

निज कर कमल परसि मम सीसा।हरषित आसिष दीन्ह मुनीसा।।

राम भगति अविरल उर तोरें।बसिहि सदा प्रसाद अब मबिलोकनि


मामवयलोकय पंकज लोचन। कृपा बिलोकनि सोच बिमोचन।।

बंंदउँ गुरु पद कंं कृपा सिंधु नररूूप हरि।
महामोह तम पुंज जासु बचन रबि कर निकर।।
बंदउँ गुरु पद पदुम परागा ।
सुरुचि सुबास सरस अनुरागा।।
अमिय मूरिमय चूरन चारू।समन सकल भव रुज परिवारू।।

सुकृति संभु तन विमल विभूती। मंजुल मंगल मोद प्रसूती।

जन मन मंजु मुकुर मल हरनी।किएँ तिलक गुन गन बस करनी।।



श्रीगुर पद नख मनि गन ज्य़ोति।सुमिरत दिव्य दृष्टि हियँ होती।।




गुरु पद रज मृदु मंजुल अंजन।नयन अमिय दृग दोष विभंजन।।