Thursday, 8 April 2021
Love is powerful.Love is wonderful.
Wednesday, 7 April 2021
दैनन्दिनी
दैनन्दिनी को आजकल कहते हैंडायरी।
डायरी लेखन साहित्य की एक विधा मान्य है। मैं शुरू से ही डायरी लेखन करता हूं।नाम दिया है""तेरी मेरी कहानी""
२३मार्च से ३०मार्च२०२१
यह २५ मार्च जूड़ा हरधन चन्दौली उ0प्र0 सतगुरु अभिनन्दन समारोह की एक स्मृति है।इस दिन की नई बात है महाराज जी के कहने पर विमला बाई जी द्वारा मेरा तिलक। और मेरे द्वारा बाई जी को जय सच्चिदानन्द का अभिवादन करना। उसके बाद हम अलग अलग वाहन से जूड़ा हरधन पहुँचे। वहां गुलाब द्वय ने अर्ध्य पाद्य से श्री स्वामी धर्मात्मानन्द जी महाराज परमहंस का अभिनन्दन किया।
शाामको तीन बजे आरती हुई।आरती के साथ ही गुुुुरदेव मुख््य््याश्रम चलने के लिए ााााआसन से चल दिए।
२७मार्च को जूड़ा हरधन के लोग यज्ञशेष लेकर मुख्याश्रम आत्मानुसंधान केन्द्र कल्याणपुरी बहरवानी में हाजिर हुए।।
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| श्री स्वामी जी को उबटन लगाते मैं और सबेरानंदजी |
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| 10मार्च2021को आश्रम के गेहूं की थ्रेसिंग की सेवा में लगा। |
संत और महंत कौन?
प्रेम जब अनन्त से हों गया
रोम रोम संत हो गया।
देवालय बन गया यह बदन
हृदय तो महन्त हो गया।
तात भरत तुम सब विधि साधू।
राम चरन तव प्रीति अगाधू।।
अपने राम के चरण कमलों में जिसका अगाध अथाह प्रेम है,वह हर प्रकार से साधु ही है।
संत सरल चित् जगत हित,ये दोनों बातें जिसमें हैं पहला निर्मल मन और दूसरा जगत के कल्याण की भावना वह संत हैं।
हेतु रहित जग जुग उपकारी।
तुम तुम्हार सेवक असुरारी।।
दरिया लच्छन साधु का,का गिरही का भेष।
निरपक्षी निर्द्वंद्व रह बाहर भीतर एक।। संत स्वभाव है,स्टेट आफ माइंड है, चित्त की दशा है।
संत न छोड़ै संतई,कोटिक मिलैं असंत।
मलय भुजंगहि बेधिया, शीतलता न तजंत।।
तब कहते हैं कि "संत कऽ हाल भगवंत न जानैं।।"
तब कहते हैं कि" सांतव सम मोहि मय जग देखा।मोतें अधिक संत करि लेखा।।"
आज कल का हाल है"जिसके संग दस पाँच हैं तिनका नाम महंत।।"












