Thursday, 8 April 2021

Love is powerful.Love is wonderful.

 

Love is both light and power.





Love     एक ऐसा लफ्ज़ जिससे पोथियां भरी हुई हैं। आधुनिक मनोविज्ञान भी जिसपर लगातार अनुसंधान किए जा रहा है। विभिन्न देशों के तीन लाख लोगों पर रिसर्च कर उसका निष्कर्ष है कि प्रेम और मित्रता आपके जीवन की लम्बाई बढ़ाने में सहायक होता हैlLive Long.
और यह किसी आध्यात्मिक प्रेम पर आधारित खोज निष्कर्ष नहीं है।मात्र मानवी प्रेम और मित्रता!
क्या है माजरा?
रसायन!
वेद कहते हैं"रसौ वै सः"
वह रस रूप है।रस ही है। वह रस है तो आप?आप भी तो वही हैं।क््य्कि वेदांत कहते हैं" तत्त्वमऽसि" वह तुम हो। 
सो तैंंंताहिििििितोहिं
सोतैं ताहि तोहिं नहिं भेदा।
बारि बीीी इव गावहिं वेदा।।
इस लिए सूूीफी सांसारिक प्रेम को भगवत प्रेम की पहली सीढ़ी माााे

Wednesday, 7 April 2021

दैनन्दिनी




 दैनन्दिनी को आजकल कहते हैंडायरी।

डायरी लेखन साहित्य की एक विधा मान्य है। मैं शुरू से ही डायरी लेखन करता हूं।नाम दिया है""तेरी मेरी कहानी""

२३मार्च से ३०मार्च२०२१


यह २५ मार्च जूड़ा हरधन चन्दौली उ0प्र0 सतगुरु अभिनन्दन समारोह की एक स्मृति है।इस दिन की नई बात है महाराज जी के कहने पर विमला बाई जी द्वारा मेरा तिलक। और मेरे द्वारा बाई जी को जय सच्चिदानन्द का अभिवादन करना। उसके बाद हम अलग अलग वाहन से जूड़ा हरधन पहुँचे। वहां गुलाब द्वय ने अर्ध्य पाद्य से श्री स्वामी धर्मात्मानन्द जी महाराज परमहंस का अभिनन्दन किया।


शाामको तीन बजे आरती हुई।
आरती के साथ ही गुुुुरदेव मुख््य््याश्रम चलने के लिए ााााआसन से चल दिए।


२७मार्च को जूड़ा हरधन के लोग यज्ञशेष लेकर मुख्याश्रम आत्मानुसंधान केन्द्र कल्याणपुरी बहरवानी में हाजिर हुए।।
यज्ञशेष का एक अंश
२८मार्च२०२१आज होलिका दहन है। परंपरा है कि आज उबटन लगाकर झिल्ली को होलिका की ज्वाला में इस भाव से दहन किया जाता है कि इसी के साथ हमारे सभी दुःख दारिद्र्य और क्लेश कलह तथा नास्तिकता भी दग्ध हो जाय।
पारसाल भी इस अवसर पर छोटू और मैं श्रीीीेेेगणेश किए जिससे प््र््््ने 
अपने 
श्री स्वामी जी को उबटन लगाते मैं और सबेरानंदजी
इस बार महाराज जी उबटन लगवााने में आनाकानी कर रहे थे।सबेेेेरानराानंद और मैने होोी जगाया"मंगले बनिया गुड़ न दे,मुंंंंह मलिअऊले भेली दे"!
10मार्च2021को आश्रम के गेहूं की थ्रेसिंग की सेवा में लगा।
21 जूू 21को श््र स्वामी जी ने कहा ट्रस्ट की स्थापना के लिए आजीवन सदस्य चुनना है, आ जाओ. मैं पहुँच गया, स्वामी जी ने सभी साधुओं का, मेरा तथा मिथििलेश का नाम मुझे  लिखने को कहा.अपन छोोोड़ कर Sab Ka Naam likh diya Maharaj Ji Ne Nagina Sanjay aur Rajkumar ka naam Khud Unse likhva. 
Aaj dinank 25 June 2021ko aashram Mein ropani Shuru आज05मार्च2023को पुनः जूड़ा दौड़ा पर बाई जी ने श्री महाराज जी के बाद छोोो के कहने पर उसको और मुझे टीका लगाया। उसके पहले 08फरवरी2023को महाशिवरात्रि पर स्वयंश्ररीी स्वााा जी ने मुझे केशर तिलक लगायामीम

संत और महंत कौन?

प्रेम जब अनन्त से हों गया

रोम रोम संत हो गया।

देवालय बन गया यह बदन

हृदय तो महन्त हो गया।



 तात भरत तुम सब विधि साधू।

राम चरन तव प्रीति अगाधू।।

    अपने राम के चरण कमलों में जिसका अगाध अथाह प्रेम है,वह हर प्रकार से साधु ही है।

संत सरल चित् जगत हित,ये दोनों बातें जिसमें हैं पहला निर्मल मन और दूसरा जगत के कल्याण की भावना वह संत हैं।

हेतु रहित जग जुग उपकारी।

तुम तुम्हार सेवक असुरारी।।

दरिया लच्छन साधु का,का गिरही का भेष।

निरपक्षी निर्द्वंद्व रह बाहर भीतर एक।। संत स्वभाव है,स्टेट आफ माइंड है, चित्त की दशा है।

संत न छोड़ै संतई,कोटिक मिलैं असंत।

मलय भुजंगहि बेधिया, शीतलता न तजंत।।

तब कहते हैं कि "संत कऽ हाल भगवंत न जानैं।।"

तब कहते हैं कि" सांतव सम मोहि मय जग देखा।मोतें अधिक संत करि लेखा।।"

आज कल का हाल है"जिसके संग दस पाँच हैं तिनका नाम महंत।।"