Sunday, 17 November 2019

चहेतियों का चरित्र: युद्ध और संघर्ष का कारण


असम्भवं हेममृगस्य जन्मः
तथापि रामो लुलुभे मृगाय
प्रायःसमापन्न विपत्ति काले
धीयोऽपि पुरुषा मलिना भवन
ति।।
स्वर्ण मृग का जन्म ही असम्भव है फिर भी राम मृगया (शिकार खेलने) के लिए लोलुप हो गए। विपत्ति काल के समीप होने पर बुद्धिमान पुरुष की बुद्धि भी मलीन हो जाती है।
मेरे देखने में आता है कि मृगया के लिए राम नहीं उनकी चहेती लोलुप हुईं।उस चहेती की कमना पूर्ति के लिए राम उस कांचन मृग के पीछे भागते हैं और अपनी मृगनयनी को गंवा बैठे। इससे पहले उनके ही पिताजी अपनी चहेती की चाहना पूर्ति में अपने दो पुत्र व एक पुत्र वधू को वनवास देकर अपने प्राण तक गंवा चुके थे।रावण भी अपनी चहेती (बहन) के चहना के वशीभूत होकर ही कुल सहित अपना नाश करता बैठा।
गंगा-वियोग से पीड़ित शांतनु की चहेती के चाह के चलते देवव्रत ने युवराज पद त्यागा और आजीवन कुंवारा रहना स्वीकार किया जो भविष्य में महाभारत का कारण बना।
इंद्रप्रस्थ नरेश की चहेती राजकुमार दुर्योधन का अपमान जनक उपहास करती हैं,बदला की भावना से ग्रस्त दुर्योधन भरी सभा में उनके चीर-हरण का असफल प्रयास करता है और महायुद्ध के बीज बोता है।
  श्रीकृष्ण की एक चहेती की चाहना हुई कि अमरावती के नन्दन-कानन का पुष्प परिजात उनके आंगन की शोभा बढ़ाए तो कृष्ण ने चोरी से परिजात उखाड़ कर गरुण पर लाद लिया और पकड़े जाने पर इन्द्र से युद्ध जीत कर परिजात चहेती को देकर ही दम लिया।यानी चहेती की ज़िद पूरी होनी चाहिए चाहे उसके लिए युद्ध और संघर्ष ही क्यों न करना पड़े।
   बुढ़ापे में किसी कन्या पर आसक्त हो कर चहेती बनाना दुखदाई होता है। बूढ़ा सम्राट अशोक अपनी युवा चहेती तिष्यरक्षिता के कहने पर अपने प्रिय और निर्दोष पुत्र कुणाल की आंखें निकलवा लेता है। कुणाल का दोष मात्र इतना था कि वह तिष्यरक्षिता के अनैतिक और घिनौने प्रस्ताव को ठुकरा देता है और चहेती की चाहना में अंधा सम्राट अशोक वही करता है जो चहेती चाहती है।।
  यदि आप बड़ियरा के मार से बचना चाहते हैं तो चहेती का चरण-चुंबन करना सीखिए।
चहेती के लिए चहेता ने यथासमय बारी-बारी सबको ठिकाने लगा दिया। यदि आप इस खुदगर्ज जमाने में भी बेगर्ज हैं, तो मस्त रहिए।
अन्यथा जैसी बहे बयार पीठ तब तैसी दीजै।।
जै जै जै।।

Saturday, 9 November 2019

रानी मक्खी

श्री स्वामी जी भक्तों के बीच में




एक निरंकुश सेविका के क्षोभकारी व अरुचिकर ऊर्जा से बचकर रहना कितना महत्वपूर्ण है? उसकी ऊर्जा किन रूपों में अभिव्यक्त हो सकती है और क्यों?
Queen Beeदूसरों से अधीनस्थ की तरह व्यवहार करती है,वह आपकी अस्मिता को नकारती है या उपेक्षा करती है और दूसरे की सेवा का श्रेय ख़ुद ले लेना चाहती है,क्यों?
  १_वह पुरुष की तरह प्रबंधक दिखना चाहती है।
२_वह असुरक्षा की भावना से ग्रस्त है कि कोई उसका स्थान न ले ले इसलिए वह अपना दबदबा कायम रखने के लिए अपने निकटतम लोगों के साथ प्रतिस्पर्धा क़ायम रखती है। जैसा कि आप सभी को पता है कि रानी मक्खी केवल एक ही हो सकती है।
Queen Beeडरी हूई है-आघात किए जाने से,हर्ट किए जाने से,नरम-दिल हो जाने से,और सबसे बढ़कर अपनी शक्ति और प्रतिष्ठा खो जाने से, इसलिए वह आक्रामक,नियंत्रक,और पीठ पीछे आपकी बुराई करने वाली तक हो जाती है।
यदि तुम यह जान ही गए हो कि पीठ पीछे आपकी बुराई करने वाले हैं तो उसे पहचानने के साथ हीQueen Beeको अनसुना और अनदेखा करते हुए अप्रभावित रहो।जब उसके नकारात्मक शब्दऔरसोच तुम पर बेअसर रहते हैं तो वह अपना भारांक खो देती है।
रानी मक्खी अवधान और चर्चा के केन्द्र में रहना पसन्द करती है इसलिए वह गर्म चर्चा को गर्माए रखने का जतन भी करती रहती है इसलिए यदि आप उससे उसकी चर्चा के केंद्र में रहने और गर्म चर्चा बनाए रखने की शक्ति एक झटके में छीन लें (उसपर ध्यान ही मत दें) तो इससे आप स्वयं के बारे में सकारात्मक महसूस करेंगे।
उसके रुक्ष व्यवहार पर सौम्यता पूर्वक, आत्मविश्वास पूर्वक बताओ कि चारों ओर के सभी व्यक्तियों से बुरा बर्ताव नहीं करना चाहिए।
वह कमजोरी की भूखी (परछिद्रान्वेषी)है, कमजोरी पकड़ कर उसका पेट भरता है, इसलिए तुम अपनी कमजोरी मत दिखाओ और दूसरों को भी अपने उदाहरण से समझाओ।
 यदि वह तुम्हें लगातार नीचा दिखाने और साइड लाइन करने की कोशिश कर रही है तब भी संवादहीनता पैदा न होने दो।इसकी कुंजी यह है कि आत्मविश्वास से भरकर उसकी आंखों में आंखें डालकर बात करो। हमेशा शांत और सौम्य रहो।
यह  देख-समझकर कि तुम अब भी उसकी आक्रामक मुखरता और चुगलाई के प्रयासों से बेफिक्र और अछूते हो,वह निश्चित ही थोड़ी भयभीत हो जाती है।
सभी मक्खियां रानी मक्खी के लिए ही भिनभिन करती हैं,तुम भी करो और..........