Wednesday, 25 September 2024

अब तोहार नाम कोई ना काटी-श्री स्वामी जी 25/09/24

परंपरागत रूप से मैं अपना जन्मदिन 23 सितम्बर को मनाता हूँ।इस वर्ष 2024 में
मैं 22 सितम्बर को आश्रम पहुँच गया और शाम को पनीर चावल का प्रसाद बनवाया बाई जी ने मुझे ही भोग लगाने का सौभाग्य सौंपा। श्री स्वामी जी ने प्रसाद की प्रशंसा किया जो कि बाई जी ने बनाया था। 
अपने जन्म दिन पर सुबह मैं खुद आरती सजाकर आरती में सम्मिलित हुआ। मैं  कई दिनों से देख रहा था कि महाराज जी घड़ी नहीं पहन रहे हैं। मैने गिफ्ट-प्रसाद में घड़ी ही माँग लिया। संयोग से उसी दिन मेरी स्मार्ट वाच बंद हुई थी। 31अगस्त से 23 सितम्बर तक घड़ी श्री स्वामी जी के पास थी। अब मेरा समय बदलने वाला है, घड़ी पाने पर मेरा भाव था। दोपहर 2 बजे जब मैं पुनः पहुँच गया तो सरकार के सामने लिट्टी- चोखा- खीर का भोग आया उन्होंने अपनी थाली से आधा प्रसाद मुझे दे दिया इस प्रकार मेरा 55 वां जन्मदिन अद्वितीय सेलीब्रेट हुआ। 
उस दिन आरती से पहले महाराज जी ने व्यवस्था देखने की बात दुहराया, बाई जी भी समर्थन करने लगीं। जिसे यह समझाया गया हो कि संदीप की उपस्थिति आपके भविष्य के लिए ठीक नहीं है वह ऐसा कह रहा है, इस पर मुझे विश्वास नहीं होता अभी मिथिलेश कह रहे थे कि आपके नाम पर आपत्ति है। मेरे यह पूछने पर कि किसे? उसने बिना नाम लिए आपकी ओर इशारा किया। 22 की सुबह भी इसकी चर्चा हुई थी
महाराज जी कह रहे थे ऐसी बात नहीं है, है तो नाम बताओ, मैंने कहा अब आपको नही ंं पता तो मैं बताऊँ? तब बाई जी ने कहा "है "! लोग कह रहे हैं " हमहन घर- दुआर छोड़ के आयल हईं जा। "
मैंने बाई जी से कहा "मेरी आपसे दुश्मनी उस दिन शुरू हुई जिस दिन महाराज जी ने ज्योति से कहा हमार संदीप साधू हऊवँय। और आपने कहा 'बडक़ा साधू  हउवन त हम जानत हईं'। मैंने आपसे तो कोई बद्तमीजी नहीं की फिर आपने ऐसा क्यों कहा? इसके लिए मुझे डायरी के तीन पन्ने रंगने पड़ गए। उन्होंने कहा पिछले दिन ज्योति ने आपकी शिकायत किया था इसलिए मैंने कहा लेकिन उन्हें बुरा लग गया कि हमरे मरद क शिकायत करत हईं। 
मैंने महाराज जी से कहा "जब आपने अपनी कंपनी में मुझे शेयर नहीं दिया तो मैं टाटा और अंबानी से शेयर लेना शुरू किया और उसी का नतीजा है कि आज मैं चार पहिया लेने की स्थिति में हूँ। " "और यहाँ कंपनी आज बंद होने कीट कगार पर है। " बाई जी ने कहा। बाई जी मुझे अपना कोषाध्यक्ष पद आफर करने लगीं। आप भागना चाहते हैं, हम छोडना ही नहीं चाहतें। 
उस दिन रात ग्यारह बजे छोटे को फोन आया महाराज जी को नींद नहीं आ रही है वह संदीप छोटे को बुला रहे हैं। दरवाजा खोलने वाली सुमन ने बताया किसी की बात सुनकर महाराज जी टेंशन  में हैं। पहुंचते ही मैनें पूछा क्या टेंशन है? 
सियरा वाली बतिया। उपस्थित लोग शेयर को सियार सुनकर हँसने लगे। मैं सिर सहलाने लगा तो उन्होंने कहा "व्यवस्था देखा"! मैंने कहा "देखत हईं! '
" सखा सोच त्यागहु बल मोरे। 
सब बिधि घटब काज मैं तोरे।। 
महाराज जी के सो जाने पर हम अपने कक्ष में आ गए। 
25 सितम्बर 24 को श्री स्वामी जी ने ट्रस्ट में सलाहकार पद का सृजन करा कर इस कठिन परीक्षा के बाद मेरा सलेक्शन कर लिया और मुझसे कहा "" अब तोहके कोई ना निकाली ""

No comments:

Post a Comment