Monday, 21 June 2021

ट्रस्ट की स्थापना



आज दिनांक 20/06/2021 सन को श्री स्वामी जी ने ट्रस्ट के आजीवन सदस्य चुना सभी साधुओं के बाद मिथिलेश संदीप संजय नगीना राजकुमार का नाम लिखवाया, मैंने संदीप का नाम लिस्ट में नहीं लिखा
क्योंकि संदीप इस पूरी व्यवस्था से अलग रहना चाहते हैं कारण कि16 जनवरी सन् 2011की दोपहर गुरदेव ने मुझसे कहा "जब से बनारसी की मौत हुई है मुझे लगता है कि किसी की मौत कभी भी हो सकती है.
मेरे न रहने पर साधुओं में पुजाने की होड़ लग सकती है ऐसे में वे मेरी समाधि बनवाने तथा भण्डारा करने से कतरा सकते हैं.सबकी ईमानदारी भी मेरी जानकारी से बाहर नहीं है.
मैं अपनी चल सम्पत्ति का नामनी तुम्हें बनाना चाहती हूँ. तुम फार्म ले आओ, मैं काम कर दूँ. प्राक्षित का धन है उससे मेरी समाधि बनवा देना और भण्डारा कर देना. जेकर जेतना शक्ति भक्ति रही ऊ ओतना पुजवाई, हम गद्दी कऽ उत्तराधिकारी ना बनाइब."
मैंने कहा"हमरे नामें काहें? "
"एसे कि तू समाधि भण्डारा कऽ काम करबा. सुरेश सुबेदार कऽ नाम भी डलवा देवय के" श्री स्वामी जी ने कहा.
31 जनवरी 2011 को उन्होंने कहा "बुढवन कऽ नाम का रही, आ राजकुमार कहत  रहलँ  हऽ कि एक जानी के नामे भी ना रहय ऊ फार्म ली अइहैं आ शिकार, भण्डारी, कोठारी सबके नामे कय देहीं.;"
इसके बाद मुझे सहखातेदार आइदर आर और सूबेदार भण्डारी ड्राइवर को अलग अलग खातों में नामिनी बनाया गया.
आठ साल बाद मार्च 2019 में सबसे पहले मैं बेदखल हुआ खाता बंद कराकर फिर भण्डारी ड्राइवर का भी वही हाल किया गया.
आज की तारीख में विमलानंद सहखातेदार इंडियन ओवरसीज बैंक सकलडीहा और बवाल    fd के नमिनी हैं जून 2021 में मुझे सुनाकर उनसे कहा गया तोहके नामिनी बना देहले हईं हमार समाधि बनवा दीहा.सूबेदार नामिनी हैं बचत खाते मेंUBIसकलडीहा में। 
इसप्रकार अब तीन बचे. तेरह की लिस्ट में आठवें नंबर पर महाराज जी ने मेरा नाम लिया और नौवें पर मिथिलेश का. मैंने अपना नाम सूची में दर्ज नहीं किया. कयोंकि दर्ज नाम खारिज होने पर दर्द देता है.
एक ही दर्द क्या कम है? जो दूसरा भी लेने की तैयारी करूँ? 
"दिल दिया दर्द लिया" इतना ही काफी है.
फिर 27 सितम्बर 2024 को ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन हुआ और इस बार भी आठवें नंबर पर मेरा नाम दर्ज हुआ। मुझे छोड़ कर सारे नाम संन्यासियों के हैं । मेरी हठधर्मिता के कारण गोरख की जगह मेरा नाम दर्ज किया गया। 




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