कबीर ने कहा है वृक्ष कबहु नहीं फल भखै ,नदी न संचय नीर। परमारथ के कारण साधुन धरा शरीर।।
18 सितंबर 2021की शाम को श्री स्वामी जी के शारीरिक अस्वस्थता के कारण उन्हें हेरीटेज अस्पताल वाराणसी में भर्ती करना पड़ा।
शरीर अस्वस्थ हैं।आक्सीजन लेवल कम ज्यादा हो रहा है।13सितम्बर2021को कोविशील्ड की पहली डोज लग गई थी।अब फेफड़े में संक्रमण के कारण साँस लेने में दिक्कत हो रही है।
रात में श्री स्वामी जी ने कहा"आज अगोरिहा जा।"
बाई जी, छोटे लाल, राजकुमार और मैं हेरीटेज अस्पताल के उस कक्ष में बारी बारी से जागने के लिए उपलब्ध हैं। ड्राइवर बाबा और गुलाब द्वय नीचे प्रतीक्षालय में मौजूद हैं।भोर में ४/१५पर बाई जी राजकुमार से कहती हैं कि अब आप जगह दीजिए संदीप भगत रात भर नहीं सोये हैं वे हो लें नहीं तो उनका शुगर बढ़ जाएगा। राजकुमार कहते हैं रोज़ सुतबय न करय लँ,एक दिन नहिंयय सुतीहँय तऽ का हो जाई। फिर मुझसे कहते हैं, चलिए सारनाथ चला जाय,इन लोगों को खाना भी भिजवा दिया जाएगा और आप भी आराम कर लेंगे। राधिका बाईऔर शांति मावा ने खाना बनाया और आनंद तथा गुरुदयाल लेकर गए।ज्योति ने पूछा"बाई जी कह रही हैं कि पिंकी अकेली है, तूं भी आ जा,का करीं ,आईं?"
मैंने कहा"आ जा।"
मैं एक रतजगा की सेवा से ही कृतार्थ अनुभव कर रहा हूं।सब अपने हिस्से की सेवा कर धन्य हों।
नाथ सकल संपदा तुम्हारी।
मैं सेवक समेत सुत नारी।।
सभी गुरुभ्राताओं की यह भावना रहती है-
मैं सेवक गुरु पद,पद मोरा।
अस अभिमान जाय नहिं भोरा।।

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