Monday, 27 January 2025

नाम रूप गति अकथ कहानी

छब्बीस साल पुरानी बात है मैंने श्री स्वामी जी से कहा "जैसे कंधार और कश्मीर के नाम शनि के प्रभाव में है वैसे ही इसका नाम भी है इसका नाम बदल दीजिये। महाराज जी ने वैसा ही किया। थोडे़ दिन बीतने पर उसने कहा इसका पहनावा गुरु के अनुकूल अनुरूप नहीं है, इसका पहनावा बदल दिया जाय। महाराज जी ने कहा अब से पैंट शर्ट मत सिलाना। जो है फटने तक पहनना। 
मैंने उसका नाम बदलवाया उसने मेरा रूप। रूप भी ऐसा कि यह कहने की सुविधा रहे कि
*जस काछिअ तस चाहिय नाचा! "
           चारो कुतिया राम की
                     करत भजन में भंग। 
                           इनको कौरा डाल कर
                              तब करा सतसंग।। 

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