Tuesday, 4 February 2025

बिरादरी वाद के कारण

दिनांक 4/2/25 को मैंने और राजकुमार ने अपने अपने मंगल कार्य को आमंत्रण श्री स्वामी जी को सौंपा। मैंने कहा दो तीन शादियां अटेंड करने के लिए वाहन की जरूरत पड़ेगी। श्री स्वामी जी ने कहा दोनों गाड़ियां ले जाना। वे संभवतः हमारी ही शादियों की आवश्यकता समझ रहे थे। लेकिन मैं एक अन्य की भी परमीशन ले रहा था। और एक की जगह नई पुरानी  दोनों ही मिल गई। 
मैंने पूछा ॓अन्य आश्रमों की तुलना में हमारे यहाँ साधुओं की संख्या कम क्यों है? "
श्री स्वामी जी ने कहा " बिरादरी वाद के चलते। "
श्री स्वामी जी वरिष्ठ साधुओं के बिरादरी वाद से व्यथित हैं। 
उन्होंने सबकी सेवा करने वाले छोटे लाल का उदाहरण देते हुए कहा "आश्रम में कोई भी ऐसा नहीं है जिसकी उसने सेवा न की हो लेकिन लोग बिरादरी वाद के चलते उससे भी जलन रखते हैं। "
राजकुमार ने कहा "क्या इसका कोई उपाय नहीं है? "
महाराज जी मौन रहे। मैं समझ सकता हूँ यदि उपाय काम कर रहा होता तो महाराज जी कर चुके होते। मैं केहि समझाऊँ जगत भइलँय अंधा। और अन्हरा के आगे रोवै आपन दीदा गोवा, वाली कहावत है। 
बाईजी ने कहा "दूसरों को नजरअंदाज करके अपना काम भजन सेवा करते रहिए। "

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